डॉ. सुधीर सक्सेना
नदी या समुंदर में गोता लगाने के किस्से आपने खूब सुने होंगे, लेकिन मिल रही खबरों की बिना पर इसी तर्ज पर हम कह सकते हैं कि हमारे पड़ोसी देश चीन ने सोने में गोता लगा दिया है। चीन पिछले 18 सालों से स्वर्ण उत्पादन में दुनिया में अव्वल है और इधर एक ओर तो उसे तिब्बत से प्रशांत महासागर तक सोने के भंडार मिलते जा रहे हैं, दूसरी ओर उसने तिब्बत, नेपाल से लेकर अरूणाचल तक सीमावर्ती क्षेत्र और प्रशांत महासागर की गहराई में सोने की खोज तेज कर दी है। फिलवक्त चीन में सोने का सालाना उत्पादन 370 से 380 मीट्रिक टन है, जो सकल वैश्विक उत्पादन का करीब दस फीसद है। चीन ने सन 2007 में स्वर्ण उत्पादन में दक्षिण अफ्रीका को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया था। तब से वह पहली पायदान पर टिका हुआ है। सोने के जरिये वह अपनी मुद्रा युआन को मजबूती देने की कोशिश तो कर ही रहा है, उसकी मंशा है कि इस कवायद से डॉलर को चुनौती और अंतत: मात दी जा सके।
ग्लोबल रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन युआन की भूमिका बढ़ाने के मकसद से सोने के वॉल्ट का एक ग्लोबल नेटवर्क बना रहा है और सेंट्रल बैंक के रिजर्व में सोने की खरीद को तेजी से बढ़ा रहा है। बीजिंग द्वारा सन 2025 में सोने को वित्तीय संपत्ति से रणनीतिक खनिज की श्रेणी में डालने के बाद चीन की सबसे बड़ी गोल्ड प्रोसेसर कंपनी ज़िजिन माइनिंग और शेंडोंग गोल्ड माइनिंग जैसी कंपनियों के ग्लोबल प्रतिस्पर्द्धा में तेजी से विस्तार की उम्मीद है। एसएंडपी ग्लोबल में कार्पोरेट रेटिंग्स के लिए अधिकृत चार्ल्स चांग ने कहा है कि अगर आप हमारी मुद्रा रनमिन-पी में व्यापार कर रहे हैं, तो हमेशा सवाल उठता है कि आप इस करेंसी का इस्तेमाल कैसे करेंगे? लेकिन यदि रनमिन-पी को सोने में बदला जा सकता है तो स्थिति भिन्न हो सकती है। फिर हम डॉलर से कमतर साबित नहीं होंगे। चीन की दो जानीमानी कंपनियों शिजांग झिहुई माइनिंग (निजी) और झाओजिन नान फेरस माइनिंग ने तिब्बत में सोना, तांबा और अन्य खनिजों के प्रोजेक्ट को मिलकर संपन्न करने के निवेश-सह-सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। निजी और सरकारी साझेदारी का यह समझौता उस देशव्यापी अभियान का ताजा और दूरगामी महत्व का उदाहरण है, जिसकी शुरूआत सन 2021 में हुई थी। यह अभियान सैन्य उपकरणों, अधुनातन उत्पादन और नव-प्रौद्योगिकी में दुर्लभ खनिजों के इस्तेमाल की होड़ और जियो पालिटिकल अनिश्चितता के लिहाज से मायने रखता है।
चीन के सुनियोजित अभियान का आकलन इससे किया जा सकता है कि उसे हिमालय और तिब्बती पठार में स्वर्ण और दुर्लभ खनिज के भंडार मिले हैं। लहुंजे काउंटी और शानन (ल्होका) के आसपास इन भंडारों का मूल्य 60 अरब डालर कूता गया है। ल्होका में 20-25 टन सोने की संभावना है, जबकि तिब्बती पठार में युशु (किंगहाई) में 300 टन से अधिक का भंडार है। इसी तरह दक्षिण तिब्बत में बांग्बू में 40 टन से ज्यादा सोना मिलने की उम्मीद है। चीनी टीम एक ओर तो नेपाल में जाजरकोट में होलू खोला में स्वर्ण भंडार तलाश कर रही है, दूसरी ओर उसने पश्चिमी प्रशांत महासागर में समुद्र तल का विशाल खनिज भंडार खोजा है, जिसमें सोने और चांदी का बड़ा अंश है। चीन ने अपने बैंक आर्क बेसिन में शंकु के आकार के तीन बड़े टीले खोज निकाले हैं, जहां मौजूद अयस्क में सोने और चांदी की मात्रा औसत से कई गुना ज्यादा है। सोने की खोज में चीन उन्नत और गहरी शाफ्ट तकनीक का उपयोग कर रहा है। प्रसंगवश भारत की बात करें तो भारत में सालाना 700 से 800 टन मांग या खपत के विपरीत मात्र डेढ़ से दो टन सोना ही निकाला जाता है। फलत: वह आयात पर निर्भर है।
चीन की इस अतुल्य स्वर्ण गाथा का महत्वपूर्ण पहले यह है कि चीन में जेवर खरीदने वाले ग्राहकों का टोटा पड़ गया है। सोने के गहनों की मांग साल की तीसरी तिमाही में 28 प्रतिशत घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गयी है। अग्रणी ब्रांड चाऊ ताई सेंग ने 473 दुकानें, लाओ फेंग जियांग ने 342, चाइना गोल्ड ने 323 और चाओ ताई फूक ने 258 आउटलेट बंद किये हैं। ग्राहक अब या तो हलके गहने लेना पसंद करते हैं अथवा पुराने आभूषणों के बदले नये गहने। बाजार के रूख में तब्दीली दर्शाती है कि चीन के सरकारी स्वर्ण भंडार में सोने की आमद बेहिसाब बढ़ रही है और वह सुविचारित तरीके से सोने का रणनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।




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