प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उसकी याचिका से पश्चिम बंगाल की चौंकाने वाली स्थिति का पता चलता है, जहां कानून के रक्षक, यानी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (CM) और बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर), ही गंभीर संज्ञेय अपराधों में शामिल हैं, जिनके लिए ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार (2014) निर्णय के तहत FIR दर्ज करने की जरूरत है.
ईडी ने मुख्यमंत्री, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है. उनका दावा है कि उन्होंने पिछले हफ्ते पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस में तलाशी अभियान के दौरान कानूनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में रुकावट डाली, डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट्स जबरदस्ती छीन लिए और ईडी अधिकारियों को गलत तरीके से कैद किया.





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