सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुलिस की मनमानी पर रोक लगाते हुए एक बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी का ठोस आधार न होने या 24 घंटे की समय सीमा बीतने के कारण छोड़ दिया गया हो, तो उसे दोबारा हिरासत में नहीं लिया जा सकता. जांच एजेंसी को उसे उसी मामले में फिर से गिरफ्तार करने के लिए सबसे पहले मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति लेनी होगी.
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) और 22(2)- जो यह गारंटी देते हैं कि हर गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी जाए. 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए- पूरी तरह से सर्वोपरि हैं और इनमें कोई ढील नहीं दी जा सकती.




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