भोपाल। मध्य भारत के सबसे बड़े गांधी भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय गांधी जैविक उत्सव का गुरूवार को भव्य समापन हुआ।इसमें क़रीब आधा दर्ज़न प्रदेशों के स्वयंसेवी संगठनों,किसानों, जैविक विशेषज्ञों,पत्रकारों,लेखकों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया।भारत का यह पहला जैविकउत्सव था,जिसमें लगभग 30 जैविक स्टाल के प्रतिनिधियों के लिए निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्टाल का कोई शुल्क भी नहीं लिया गया। इसके अलावा यह पहली बार हुआ,जब उत्सव में किसानों की बची हुई सामग्री को भी गांधीभवन ने ख़रीद लिया। इससे उन्हें कोई घाटा नहीं हुआ।आयोजन में छह विमर्श सत्र हुए। इनमें निर्णय लिया गया कि हर महीने एक दिन का जैविक उत्सव गांधी भवन में होगा।गांधी भवन परिसर में एक गांधी घर भी बनाया जाएगा। इसमें अन्य अतिथियों के अलावा किसान बिना कोई शुल्क दिए ठहर सकेंगे। इस गांधी घर का निर्माण मिट्टी ,गोबर,भूसा और चूने से बनाया जाएगा। भवन में शीघ्र ही सौर ऊर्जा संचालित बिजली बनने लगेगी।
उत्सव में प्रतिदिन दो वैचारिक सत्र हुए।इनमें जैविक खेती से लाभ ,उर्वरकों के प्रयोग से नुक़सान,किचिन गार्डन ,रूफ गार्डन,पर्यावरण संतुलन , स्वच्छ पानी की उपलब्धता ,पर्यावरणीय पर्यटन, प्राकृतिक,परंपरागत और जैविक खेती की व्याख्या तथा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज पर गहन मंथन हुआ। इन सत्रों में हुए विमर्श का निचोड़ एक दस्तावेज़ की शक्ल में शीघ्र ही लोकार्पित किया जाएगा। जिन उत्पादों को सबसे अधिक खरीदा,सराहा गया,उनमें आम,आँवला, मिर्च,करौंदा और कैंथे ( कबीट ) और अंडियों ( सहजन या मुनगे की जड़ का अचार ),ताज़ी सब्ज़ियां ,कठिया गेंहूँ का दलिया,जैविक मूँग,चना उड़द अरहर और मसूर की दाल, हल्दी, धनिया, मिर्च, महुआ,गुड़,गरम मसाला और अंगिठा, सूरन,शकरकंद और खादी के वस्त्र तथा भोपाल की पहचान रही ज़री दोज़ी के उत्पादों की बिक्री ज़बरदस्त हुई।प्रतिभागियों को छतरपुर के कार्यकर्ताओं की ओर से बनाए गए ताज़े ठडूले बेहद पसंद आए।रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत लोकसंगीत से मनोरंजन हुआ।
इस राष्ट्रीय समागम के अंतिम दिन गांधी भवन न्यास के सचिव दयाराम नामदेव की संस्मरणात्मक पुस्तक बीते दिनों की बीती यादें का लोकार्पण भी किया गया। श्री नामदेव संत विनोबा भावे की भूदान यात्रा में सहयोगी रहे हैं।भूदान आंदोलन संसार का सबसे बड़ा ज़मीन दान करने का आंदोलन रहा है।इसमें क़रीब 46 लाख एकड़ ज़मीन 6 लाख से ज़्यादा भूमिहीन किसानों को वितरित की गई थी।भावुक लोकार्पण समारोह में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर,पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त और जैविक तथा पर्यावरण आंदोलन चला रहे आर के पालीवाल, प्रख्यात चिंतक और समाजवादी विचारक रघु ठाकुर,जाने माने शायर आलोक त्यागी ( दुष्यंत कुमार के पुत्र ) राष्ट्रीय नीति आयोग के साथ साझा कार्यक्रम चला रहीं सुश्री उपमा दीवान,छतरपुर गांधी स्मारक निधि की प्रभारी और किसान सुश्री दमयंती पाणी,गांधीवादी विचारक प्रेमनारायण मिश्रा,कवि और लेखक डॉक्टर सुधीर सक्सेना,बाल साहित्य के लिए आंदोलन चला रहे महेश सक्सेना,नर्मदा बचाओ आंदोलन से लंबे समय तक सम्बद्ध रहे सर्वोदय प्रेस सर्विस के संपादक राकेश दीवान,गांधीवादी पत्रकार और बायोपिक निर्माता निर्देशक राजेश बादल,राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित स्वयंसेवी संस्था विकास संवाद के कर्ता धर्ता सचिन जैन, समाजवादी चिंतक बाल मुकुंद भारती, सप्रे संग्रहालय समिति के अध्यक्ष डॉक्टर शिवकुमार अवस्थी और फिल्म-टीवी पत्रकार रहे और इन दिनों जैविक खेती कर रहे जय प्रकाश दीवान,युवा विचारक तथा गांधी वादी कार्यकर्त्ता अंकित मिश्रा तथा पुस्तक के प्रकाशक और वरिष्ठ पत्रकार कैलाश आदमी भी मौजूद थे। कार्यक्रम में उपस्थित लोग उस समय भावुक हो गए,जब श्री नामदेव ने पुस्तक प्रसंग बताया।
तीन दिन के इस आयोजन में कृषि जानकार पद्मश्री बाबूलाल दहिया के खेती किसानी से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों का सभी ने लाभ उठाया। इसके अलावा गांधी भवन न्यास के अध्यक्ष संजॉय सिंह ने गांधीभवन में ऐसी ही गतिविधियों को तेज़ करने पर ज़ोर दिया।कई मायनों में यह उत्सव एक पारिवारिक उत्सव बन गया।छतरपुर से आई कृषक कार्यकर्ताओं ने सुबह गरमा गरम स्वल्पाहार मुहैया कराया तो गांधी भवन संचालित आसरा वृद्ध जन आश्रम ने तीनों दिन दोपहर और शाम का सुस्वादु भोजन पहुंचाया। गांधी भवन के सभी कार्यकर्ताओं -सुनील शेट्टी,सुनील मालवीय,पवन दुबे,असगर गुड्डू , इंद्रमणि,सुरेश,वीरेंद्र और गोटाबाई ने उत्सव को सफल बनाने के लिए दिन रात एक कर दिया।





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