अश्वनी कुमार
पूर्व ब्यूरो चीफ, आज तक टीवी, जम्मू
पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक कहानी विरोधाभासों से भरी हुई है। एक तरफ सरकार सार्वजनिक कर्ज, ब्याज भुगतान, करों के दबाव और सीमित राजकोषीय गुंजाइश के बोझ तले दबती जा रही है। दूसरी तरफ विदेशों में बसा पाकिस्तानी समुदाय—खासकर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के मीरपुर संभाग का बड़ा प्रवासी समाज—हर साल अरबों डॉलर घर भेज रहा है, मकान बना रहा है, कारोबार खड़े कर रहा है, शादियों और पारिवारिक समारोहों पर खर्च कर रहा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था में हजारों लेन-देन को गति दे रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो पाकिस्तान की सरकार चलाने के लिए कर्ज लिया जा रहा है, जबकि विदेशों में काम कर रहे लाखों पाकिस्तानी वह विदेशी मुद्रा कमा रहे हैं, जो देश की व्यापक अर्थव्यवस्था को सांस दे रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 की पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने लगभग 3.63 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का प्राथमिक अधिशेष दर्ज किया, जबकि संघीय राजकोषीय घाटा करीब 4.8 लाख करोड़ रुपये रहा। लेकिन घाटे में सुधार के बावजूद मूल समस्या जस की तस है—बहुत बड़ा कर्ज और उस पर चुकाया जाने वाला भारी ब्याज।
वित्त वर्ष 2026-27 का संघीय बजट लगभग 18.77 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। इसमें करीब 8.05 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान के लिए निर्धारित हैं।
सरल भाषा में इसका अर्थ है कि सरकार के संसाधनों का असाधारण रूप से बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज की कीमत चुकाने में जा रहा है।
इसका सीधा असर विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपलब्ध धन पर पड़ता है।
पाकिस्तान की समस्या केवल किसी एक साल के बजट घाटे की नहीं है। यह एक संरचनात्मक समस्या बन चुकी है।
सरकार को वेतन, रक्षा, विकास, सब्सिडी और सार्वजनिक सेवाओं के लिए धन चाहिए। लेकिन उसका घरेलू कर आधार अपेक्षाकृत सीमित है। जब खर्च उपलब्ध राजस्व से अधिक हो जाता है तो सरकार कर्ज लेती है।
कर्ज बढ़ता है तो ब्याज भुगतान बढ़ता है। ब्याज भुगतान बढ़ता है तो विकास के लिए पैसा कम पड़ता है। इसके बाद सरकार पर कर और शुल्क बढ़ाने या फिर नया कर्ज लेने का दबाव आता है।
कम राजस्व → कर्ज → बढ़ता कर्ज → अधिक ब्याज भुगतान → विकास के लिए कम गुंजाइश → अधिक करों का दबाव → कमजोर आर्थिक गतिविधियां → फिर कर्ज।
इसीलिए हालिया राजकोषीय सुधार को सावधानी से देखने की जरूरत है। घाटा कम होना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि यह सुधार कितना टिकाऊ है।
यदि राजकोषीय अनुशासन मुख्य रूप से विकास खर्च में कटौती, निवेश टालने या कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से हासिल होता है, तो तत्काल आंकड़े बेहतर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की भविष्य की उत्पादन क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
यही इस्लामाबाद के सामने सबसे बड़ी आर्थिक दुविधाओं में से एक है।पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का दूसरा चेहरा—प्रवासी पाकिस्तानी
पाकिस्तान की वित्तीय कहानी का दूसरा पहलू उसके विदेशों में बसे नागरिक हैं।
ब्रिटेन, खाड़ी देशों, अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले लाखों पाकिस्तानी हर साल अरबों डॉलर पाकिस्तान भेजते हैं। ये रेमिटेंस विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराते हैं, परिवारों की खपत को सहारा देते हैं और देश के बाहरी भुगतान पर दबाव कम करने में मदद करते हैं।
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत रेमिटेंस प्रवाह दर्ज किया है। ब्रिटेन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान के लिए प्रमुख रेमिटेंस स्रोतों में शामिल हैं।
लेकिन इस राष्ट्रीय कहानी को समझने के लिए मीरपुर का उदाहरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
मीरपुर संभाग का विदेशों में बसे पाकिस्तानी समुदाय के साथ रिश्ता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी है। खास तौर पर ब्रिटेन में रहने वाला बड़ा मीरपुरी समुदाय दशकों से अपने मूल क्षेत्र से गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस प्रवास की ऐतिहासिक जड़ें काफी पुरानी हैं। मंगला बांध के निर्माण के आसपास के दशकों में इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर प्रवास बढ़ा और बाद में ब्रिटेन में परिवार तथा समुदाय आधारित नेटवर्क मजबूत होता गया।
आज मीरपुर के अनेक परिवार वस्तुतः दो दुनियाओं के बीच रहते हैं।
वे साल का अधिकांश समय ब्रिटेन, अमेरिका या खाड़ी देशों में बिताते हैं, लेकिन उनकी भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक जड़ें मीरपुर में बनी रहती हैं।
शादियां हों, पारिवारिक समारोह हों, धार्मिक अवसर हों या संपत्ति से जुड़े मामले—मीरपुर से उनका रिश्ता बना रहता है।
इस संबंध की गहराई का एक भावनात्मक पहलू यह भी है कि हजारों किलोमीटर दूर विदेश में किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु होने के बाद भी कुछ परिवार शव को मीरपुर लाकर पैतृक कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार/दफन करना पसंद करते हैं।
इसलिए कई परिवारों के लिए मीरपुर केवल जन्मभूमि या मूल स्थान नहीं है—वह आज भी उनका घर है।
बंद हवेलियों का शहर
मीरपुर के कुछ इलाकों से गुजरते हुए प्रवासी अर्थव्यवस्था की एक अलग तस्वीर दिखाई देती है।
बड़े-बड़े मकान और आलीशान कोठियां—जिनमें कुछ कथित तौर पर चार या छह कनाल तक में बनी हैं—विदेशों में कमाई गई संपत्ति के प्रतीक बन गई हैं।
लेकिन इनमें से अनेक मकान वर्ष के अधिकांश समय बंद रहते हैं।
किसी बड़ी हवेली में शायद केवल एक केयरटेकर रहता है, जबकि उसके मालिक हजारों किलोमीटर दूर ब्रिटेन या अमेरिका में अपना जीवन बिता रहे होते हैं।
इस दृश्य में एक विडंबना जरूर है—ब्रिटेन या अमेरिका में कमाए गए पैसे से बने मकान, लेकिन उनमें रहने वाले लोग हजारों किलोमीटर दूर।
फिर भी खाली मकान भी अर्थव्यवस्था पैदा करता है।
निर्माण सामग्री, मजदूर, वास्तुकार, बिजली मिस्त्री, प्लंबर, फर्नीचर निर्माता, परिवहनकर्ता, प्रॉपर्टी डीलर और रखरखाव से जुड़े लोग—सभी इस प्रवासी धन से लाभान्वित होते हैं।
विदेश में कमाया गया पैसा पूरी तरह विदेश में नहीं रहता। उसका एक हिस्सा मीरपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था में लौट आता है।
शादी—जहां प्रवासी धन सबसे ज्यादा दिखाई देता है
मीरपुर में प्रवासी अर्थव्यवस्था की सबसे स्पष्ट तस्वीर शायद शादियों में दिखाई देती है।
विदेशों में बसे मीरपुरी परिवारों के लिए बड़े पारिवारिक समारोह अब भी अक्सर मीरपुर में आयोजित होते हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, खाड़ी देशों और अन्य स्थानों से रिश्तेदार यहां पहुंचते हैं।
शादी के मौसम में मैरिज हॉल व्यस्त हो जाते हैं। कैटरिंग कारोबार को ऑर्डर मिलते हैं। टैक्सी और परिवहन व्यवसाय को काम मिलता है। ज्वेलरी की दुकानें, कपड़ा बाजार, सजावट करने वाले, फोटोग्राफर, ब्यूटी पार्लर, फर्नीचर विक्रेता और दूसरे कारोबार भी इससे लाभान्वित होते हैं।
शादी भले ही कुछ दिनों की हो, लेकिन उसके आसपास घूमने वाला पैसा दर्जनों कारोबारों को आय देता है।
ब्रिटेन में कमाया गया एक पाउंड अंततः मीरपुर के किसी होटल कर्मचारी, दर्जी, टैक्सी चालक, दुकानदार या कैटरर की आय का हिस्सा बन सकता है।
£2 मिलियन प्रतिदिन का दावा
प्रवासी समुदाय और विदेशों में कारोबार से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों ने अनुमान लगाया है कि मीरपुर के प्रवासी समुदाय के माध्यम से प्रतिदिन करीब 20 लाख पाउंड तक इस क्षेत्र में रेमिटेंस और विदेशों से आने वाले लोगों के खर्च के रूप में प्रवाहित हो सकते हैं।
यदि यह राशि करीब 300 दिनों तक बनी रहे तो सैद्धांतिक रूप से यह लगभग 60 करोड़ पाउंड सालाना बैठती है।
हालांकि, प्रतिदिन £2 मिलियन का आंकड़ा समुदाय से जुड़े लोगों का अनुमान है और इसे आधिकारिक एवं सटीक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन किसी सटीक आंकड़े की अनुपस्थिति इस व्यापक आर्थिक घटना को नकारती नहीं है।
मीरपुर के संपत्ति बाजार, निर्माण क्षेत्र, खुदरा कारोबार, होटल उद्योग और पारिवारिक खर्च में प्रवासी अर्थव्यवस्था की मौजूदगी साफ दिखाई देती है।
रेमिटेंस केवल बैंक ट्रांसफर नहीं
विदेशों में रहने वाले परिवारों का आर्थिक योगदान केवल बैंक खाते में भेजी गई रकम तक सीमित नहीं है।
यह कई रूपों में सामने आता है—
- परिवारों को रेमिटेंस
- मकानों का निर्माण
- संपत्ति की खरीद
- दुकानों और कारोबार में निवेश
- शादियों पर खर्च
- होटल और रेस्तरां में खर्च
- शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च
- वाहन खरीदना
- फर्नीचर और घरेलू सामान की खरीद
एक बिल्डर मजदूरों को भुगतान करता है। दुकानदार अपने कर्मचारियों को वेतन देता है। होटल स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से सामान खरीदता है। कैटरर मजदूरों को रोजगार देता है। परिवार आभूषण और कपड़े खरीदते हैं। परिवहन संचालक को किराया मिलता है।
इस तरह आर्थिक श्रृंखला आगे बढ़ती है—
विदेशी कमाई → रेमिटेंस/निवेश → पारिवारिक खर्च → कारोबार का टर्नओवर → रोजगार → स्थानीय आर्थिक गतिविधि।
इसीलिए रेमिटेंस को केवल एक परिवार द्वारा दूसरे परिवार को भेजा गया पैसा मानना अधूरा दृष्टिकोण होगा। यह व्यापक अर्थव्यवस्था में मांग और गतिविधि को बढ़ावा दे सकता है।
बैंकिंग व्यवस्था और अगली चुनौती
PoJK की बैंकिंग व्यवस्था भी इस रेमिटेंस ढांचे का हिस्सा है। बैंक ऑफ PoJK सहित वित्तीय संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर चैनलों के माध्यम से होम-रेमिटेंस सेवाएं उपलब्ध कराती हैं और मीरपुर तथा PoJK के अन्य क्षेत्रों में शाखाओं का नेटवर्क संचालित करती हैं।
औपचारिक वित्तीय चैनलों का महत्व स्पष्ट है। विनियमित वित्तीय संस्थानों के माध्यम से आने वाला धन वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करता है, औपचारिक अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराता है और वित्तीय प्रवाह का रिकॉर्ड भी बनाता है।
लेकिन यही व्यवस्था एक बड़ा सवाल भी सामने रखती है—
क्या रेमिटेंस पर निर्भर खपत को उत्पादक निवेश में बदला जा सकता है?
यही मीरपुर के सामने अगली बड़ी आर्थिक चुनौती हो सकती है।
प्रवासी समुदाय ने संपत्ति पैदा करने की अपनी क्षमता साबित की है। अब सवाल यह है कि क्या इस संपत्ति का बड़ा हिस्सा रोजगार पैदा करने वाले निवेश में बदला जा सकता है।
एक मकान परिवार को आश्रय देता है और संपत्ति का प्रतीक बनता है। लेकिन एक फैक्टरी सैकड़ों लोगों को रोजगार दे सकती है।
एक टेक्नोलॉजी कंपनी कुशल नौकरियां पैदा कर सकती है। पर्यटन परियोजना लगातार आय पैदा कर सकती है। आधुनिक अस्पताल पूरे जिले को स्वास्थ्य सेवाएं दे सकता है। विश्वविद्यालय या व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान मानव संसाधन तैयार कर सकता है।
मीरपुर की प्रवासी संपत्ति यदि छोटे और मध्यम उद्योगों, पर्यटन, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में अधिक निवेश हो, तो यह कहीं बड़ी विकास शक्ति बन सकती है।
मीरपुर का मॉडल और इस्लामाबाद की चुनौती
यहीं पाकिस्तान की व्यापक आर्थिक दुविधा सामने आती है।
इस्लामाबाद को विदेशी मुद्रा चाहिए। उसे कर राजस्व चाहिए। उसे निवेश चाहिए। उसे आर्थिक विकास चाहिए।
और विदेशों में रहने वाले लाखों पाकिस्तानी पहले से ही वह विदेशी मुद्रा कमा रहे हैं जिसकी देश को सख्त जरूरत है।
लेकिन रेमिटेंस घरेलू अर्थव्यवस्था की जगह स्थायी रूप से नहीं ले सकती।
कोई भी देश केवल विदेशों में काम कर रहे अपने नागरिकों द्वारा भेजे गए पैसे के सहारे भविष्य नहीं बना सकता। रेमिटेंस जीवनरेखा हो सकती है, लेकिन अंतिम लक्ष्य ऐसी घरेलू अर्थव्यवस्था का निर्माण होना चाहिए जो देश के भीतर ही रोजगार, निर्यात, निवेश और कर राजस्व पैदा करे।
यहीं पाकिस्तान की राजकोषीय चुनौती और गहरी हो जाती है।
मीरपुर दिखाता है कि विदेशों में कमाया गया पैसा क्या कर सकता है। इस्लामाबाद के सामने चुनौती यह है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में भी ऐसी उत्पादक ऊर्जा कैसे पैदा की जाए।
इस्लामाबाद में अरबों रुपये कर्ज की ब्याज अदायगी में खर्च हो रहे हैं। मीरपुर में विदेशों में कमाया गया धन मकानों, शादियों, दुकानों, निर्माण और पारिवारिक कारोबार के जरिए लगातार घूम रहा है।
एक पाकिस्तान के अतीत में लिए गए कर्ज की कीमत को दर्शाता है। दूसरा विदेशों में काम कर रहे पाकिस्तानियों की आर्थिक क्षमता को।
पाकिस्तान के सामने असली सवाल यही है कि क्या वह प्रवासी कमाई की इस शक्ति को एक मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था की नींव में बदल सकता है—इससे पहले कि कर्ज और ब्याज उसके आर्थिक भविष्य का और बड़ा हिस्सा निगल जाएं।





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