राजेश बादल
ग़ज़ल शिरोमणि जगजीत सिंह राजस्थानी थे और यह प्रदेश उनकी सांसों में धड़कता था। राजस्थान के लोग भी उनको उतना ही प्यार करते हैं।इसीलिए जब देश भर में अपनी गतिविधियों के ज़रिए पहचान बना चुकी विकल्प संस्था ने अपने इस लाड़ले बेटे को याद करने के लिए कार्यक्रम किया तो लोग उमड़ पड़े । जब अमेरिका से आए दिलजीत सिंह ने जगजीत सिंह की गाई ग़ज़लों को अपना स्वर दिया तो गुलाबी नगर के जवाहर कला केंद्र का रंगायन सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा । उनके अलावा दूर दूर से आए कलाकारों ने जगजीत की ग़ज़लों को पेश किया तथा ग़ज़लों पर नाट्य रूपांतर भी प्रस्तुत किया ।
इस कार्यक्रम की जान थे जगजीत के सगे बड़े भाई सरदार जसवंत सिंह।उन्होंने ही जगजीत को संगीत सीखने के लिए हारमोनियम दिलाया और संगीत सीखने का माहौल दिया । नब्बे साल की उमर वाले जसवंत सिंह के चेहरे पर उस दिन वो चमक देखी,लगा कि जैसे उनका अपना जीती लौट आया हो।
इसी जलसे में विकल्प के मुखिया मोहनलाल गोयल और सरदार जसवंत सिंह ने मुझे जब जगजीत सिंह सम्मान दिया तो पल भर को एहसास हुआ कि मानो जगजीत सिंह ही मेरे सामने आ गए थे । मित्र प्रेमचंद गांधी ने मानपत्र पढ़ा तो वह भावुक करने वाला लम्हा था । जगजीत सिंह पर पाँच घंटे की फ़िल्में और उनकी बायोग्राफी - कहां तुम चले गए , दास्तान ए जगजीत लिखने में जिस जगजीत को मैंने समझा,वह मेरी दृष्टि में उन्हें फरिश्ता बनाती है।मैने अपने संबोधन में यह बात कही और जयपुर के लोगों से उम्मीद जताई कि वे अपने इस बेजोड़ फनकार को ऐसे ही याद करते रहेंगे । अगले दिन जगजीत प्रेमियों ने वसुंधरा जन साहित्य परिषद के बैनर तले मेरा कार्यक्रम दास्तान ए जगजीत आयोजित किया । चित्र इसी कार्यक्रम के हैं ।






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