सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि महंगाई की भरपाई के लिए दिए जाने वाले भत्तों को बढ़ाते समय, सरकार सेवारत कर्मचारियों (नौकरी कर रहे) और पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव नहीं कर सकती. अदालत ने कहा कि "महंगाई का दबाव किसी कर्मचारी और पेंशनभोगी के बीच अंतर नहीं करता है."
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सेवानिवृत्त कर्मचारियों (रिटायर हो चुके लोगों) के समानता के अधिकार को बरकरार रखा. पीठ ने कहा, "हमारी राय में, जब ये लाभ एक समान उद्देश्य के लिए दिए जाते हैं और महंगाई से जुड़े होते हैं, और महंगाई का दबाव किसी नौकरी कर रहे कर्मचारी और पेंशनभोगी के बीच भेदभाव नहीं करता, तो महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को बढ़ाने के लिए अलग-अलग दरें तय करने का कोई तार्किक आधार नहीं है. यह कदम न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि मनमाना भी है."




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