डॉ. सुधीर सक्सेना
जोहरान ममदानी अब न्यूयार्क के निर्वाचित महापौर हैं। वह अमेरिका के राजनीतिक-नभ में धूमकेतु की मानिंद उभरे हैं। ठीक वैसे ही जैसे कभी सोवियत रूस के परिदृश्य में करीब चार दहाई पहले बोरिस येल्तसिन का उदय हुआ था। दोनों में तुलना बेमानी होगी, लेकिन जोहरान ममदानी अपनी तुर्श-जुबानी से फिलवक्त विश्वव्यापी सुर्खियों में है। बिला शक वह जेरे-बहस भी हैं। उनके आतिशी बयानों ने सनसनी फैलाने के साथ-साथ लोगों को तरह-तरह के कयास लगाने को बाध्य कर दिया हे। अब ट्रंप के विरोध के बावजूद उनके न्यूयार्क का मेयर चुन लिए जाने के बाद इसका असर न्यूयार्क की अंदरूनी तस्वीर के साथ ही अमेरिकी राजनय और विभिन्न देशों से अमेरिका के रिश्तों पर भी पड़ेगा।
शेक्सपियर भले ही कहते हों कि नाम में क्या धरा है, लेकिन नाम बहुत कुछ कहता है। उनका पूरा नाम है जोहरान क्वामे ममदानी, लेकिन यह नाम भी उनके कुल-गोत्र और सजरे को समग्रता में व्यक्त नहीं करता। यह उनकी जड़ों की ओर भी संकेत नहीं करता। वह गुजरात के शिया-मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी रगों में मिश्रित रक्त बह रहा है। पिता मुस्लिम हैं, तो मां पंजाबी हिन्दु। उनके पिता महमूद ममदानी शिक्षाविद हैं, जो गुजरात से अफ्रीका चले गये थे। उनकी मां मीरा नायर सिने-संसार की जानी मानी हस्ती हैं और मिसीसिपी मसाला, द नेमसेक, मानसून वेडिंग और सलाम बांबे जैसी चर्चित फिल्में के लिये जानी जाती है। पद्मभूषण से सम्मानित 67 वर्षीया मीरा ने सन 1991 में महमूद ममदानी से दूसरी शादी की। 18 अक्टूबर, सन 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में जनमे जोहरान इसी युगल की संतान हैं। बाल्यावस्था दक्षिण अफ्रीका में बिताने के बाद सात साल की उम्र में वह संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर न्यूयार्क में बस गये। ब्रोंक्स हाईस्कूल ऑफ साइंस से स्नातक के बाद उन्होंने बोडोइन कॉलेज से अफ्रीकन स्टडीज में डिग्री हासिल की। राजनीति में पदार्पण के पूर्व वह हाउसिंग काउंसलर रहे और हिप-हाप संगीतकार के रूप में सक्रिय रहे। इन्हीं दिनों उनके विचार सरोकारों की सान चढ़े और उन्होंने आवासीय समस्या और उसके समाधान पर ध्यान दिया। वह पहले-पहल सन 2020 में न्यूयार्क स्टेट असेंबली के लिए चुने गये। उन्होंने चार बार के विजेता अरावेला सिमोटास को मात देकर सबको चकित कर दिया। अपनी कथनी और करनी से उन्होंने वाहवाही बटोरी और लगातार निर्विरोध चुने जाते रहे। गत वर्ष उन्होंने सन 2025 के महापौर के चुनाव में अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया। शत-प्रतिशत संभावना थी कि वह न्यूयार्क शहर के मेयर चुने जायेंगे। वजह यह कि उन्होंने अपनी मुहीम में बसों में मुफ्त यात्रा, बच्चों की देखभाल, राजकीय स्वामित्व की किराना दुकानों, भवनों का किराया बांधने और आवासीय ईकाइयों के निर्माण की घोषणा कर आम लोगों के बीच 'उम्मीद का चिराग' बनकर उभरे हैं। लोगों की उम्मीदों का ग्राफ उनकी सफलता की ओर संकेत करता है। डेमोक्रेटिक प्राइमरी अभियान के दौरान उन्हें बनी सैन्डर्स और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोर्टेज जैसी प्रगतिशील और सम्मानित हस्तियों का समर्थन मिला।
जोहरान के पूरे नाम पर गौर करें। जोहरान क्वामे ममदानी। नाम और कुल नाम का मध्यवर्ती क्वामे उनके पिता की च्वाइस और देन है। क्वामे एनक्रूमा घाना के राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री थे और उन्हे पैन - अफ्रीकी नेता और अश्वेत मुक्ति के महानायक के तौर पर देखा जाता है। वह अफ्रीका के लेनिन कहलाये और सन 1963 में उन्हें लेनिन शांति पुरस्कार से नवाजा गया। जाहिर है कि नाम में क्वामे का समावेश प्रयोजनमूलक होने से मायने रखता है। इस ओर भी संकेत करता है कि वैचारिक दृष्टि से जोहरान किसके नक्शे-पा चलेंगे? बहरहाल वह न्यूयार्क के मेयर पद के चुनाव की रेस में उलटफेर करने में सफल रहे हैं। इस महत्वपूर्ण पद पर प्रतिष्ठित पहले भारतवंशी के साथ ही पहले मुस्लिम भी हैं। अपने प्रतिद्वन्द्वी और पूर्व गवर्नर को डेमोक्रेटिक प्राइमरी में मात देने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुये कहा - " आज रात हमने इतिहास रच दिया।" प्रतिद्वन्द्वी एंड्रयू कुओमो ने 'आज की रात हमारी नहीं थी। यह ममदानी की रात है' कहकर उन्हें फोन पर बधाई थी।
जोहरान ममदानी की उम्र ज्यादा नहीं है। महज तैंतीस वर्ष। वह साफग़ो हैं और ऊर्जा से लबरेज हैं। उन्हें अपने मुसलमान होने पर फख्र हैं और वह इस्रायल के मुखर आलोचक हैं। वह आवास, पुलिस और जेल सुधारों के हिमायती हैं। पिछले चुनावों में रिपब्लिकनों ने उनके विरोध की जहमत गवारा नहीं की। वह न्यूयार्क के मुस्लिम डेमाक्रेटिक क्लब के मेंबर हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र में एस्टोरिया भी है, जहां मुस्लिमों और अरबों की अच्छी खासी तादाद है। वह कार्पोरेट - चालित राजनीति के बरक्स अवाम - चालित -आंदोलन की बात करते हैं। वह नये बिजली घर चाहते हैं और मुफ्त बस सेवा। वह अपराधों पर काबू के लिए मानसिक स्वास्थ्य सुधारने पर बल देते हैं और सामाजिक आवास विकास एजेंसी बनाना चाहते हैं। न्यूयार्क शहर में वह सभी परिवारों को बेबी-बास्केट देने की बात करते हैं। उन्होंने बड़ी तादाद में फाइनेंसर भी जुटा लिये हैं। वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रीतियों-नीतियों के विरोधी हैं। गुजरात के सांप्रदायिक घटनाक्रम पर उनकी तीखी टिप्पणी ने सनसनी फैला दी थी। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तीखी आलोचना करते हुये यहां तक कहा है कि वह उन्हें मैडिसन स्क्वेयर में सभा नहीं करने देंगे। किस्सा कोताह यह कि जोहरान क्वामे ममदानी ऐसा विवादास्पद चेहरा बनकर उभरे हैं, जिसके आगामी कल को लेकर सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं।




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