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Added on : 2025-12-12 09:12:06

राजेश बादल
पाकिस्तान के चक्रवर्ती शासक बने फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर अब अपने अश्वमेध यज्ञ की तैयारी कर रहे हैं। वे अब एक ऐसा मुल्क़ बनाना चाहते हैं,जो हमेशा फौज की कठ पुतली बना रहे और कोई भी सियासी पार्टी अथवा सरकार उसके सामने मुश्किल खड़ी नहीं कर सके।वे अब पाकिस्तान को 12 छोटे टुकड़ों में बाँटना चाहते हैं। तर्क दिया जा रहा है कि छोटे प्रदेश बनाने से विकास की गति तेज़ होती है।उनके नुमाइंदे हिन्दुस्तान समेत आसपास के अनेक देशों का उदाहरण देकर अवाम के बीच इस तरह से पक्ष रख रहे हैं ,मानों छोटे राज्य बना देने से करोड़ों लोगों की क़िस्मत खुल जाएगी और वे यक़ ब यक़ मालामाल हो जाएँगे। पाकिस्तान के राजनीतिक दल इस पर आपस में द्वंद्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनकी पार्टी देश के पुनर्गठन के पक्ष में है,लेकिन राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी का दल इस प्रस्ताव का सख़्त विरोध कर रहा है।
दरअसल रविवार को शेखूपुरा में सरकार में शामिल पार्टी इस्तेहकाम -ए -पाकिस्तान का बड़ा जलसा हुआ था। इस पार्टी के कोटे से केंद्र सरकार में संचार मंत्री अब्दुल अलीम ख़ान ने आसिम मुनीर की इस ख़ुफ़िया योजना का भंडाफोड़ कर दिया। वे फील्ड मार्शल के बेहद निकट हैं। अलीम ख़ान ने कहा कि सिंध और पंजाब में तीन तीन नए प्रदेश बनाए जाएँगे।इसी तरह का बँटवारा बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांतों का किया जाएगा।अलीम ख़ान के इस बयान ने हड़कंप मचा दिया। नवाज़ शरीफ़ की गठबंधन सरकार में शामिल पाकिस्तान पीपल्स पार्टी विरोध की मुद्रा में आ गई। सिंध सूबे में उनकी सरकार है।वहाँ के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने अप्रत्यक्ष रूप से आसिम मुनीर को धमकी दे दी।उन्होंने कहा कि सिंध को बांटने की ताक़त सिर्फ़ अल्लाह के पास है और पाकिस्तान में कोई अल्लाह से ऊपर नहीं है। मुरादअली ने लोगों से कहा कि यह एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देना चाहिए। पीपीपी के अलावा अवामी नेशनल पार्टी तथा बलूचिस्तान की लगभग सभी सियासी पार्टियाँ इसके विरोध में हैं।
पाकिस्तान के वित्तीय मामलों के जानकार इस फ़ैसले को आत्मघाती मानते हैं। वे कह्रत्ते हैं कि इससे केवल सेना का मंसूबा पूरा होगा। देश दशकों पीछे चला जाएगा। वे कहते हैं कि पाकिस्तान की कुल आय का 48 प्रतिशत क़र्ज़ चुकाने में चला जाता है।इसके बाद क़रीब 20 प्रतिशत फौज और रक्षा संसाधनों पर खर्च होता है।शेष 30 में से 25 प्रतिशत स्थापना व्यय है।यानी राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,सरकार, मंत्रियों और अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतन भत्तों में चला जाता है। बचे 5 फ़ीसदी धन में से प्रस्तावित 7 नए प्रदेशों पर फूंका जाएगा। हालांकि आर्थिक अनुमान के मुताबिक़ नए राज्यों के ढांचा निर्माण और उनके कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 13 प्रतिशत भार पड़ेगा। तात्पर्य यह कि पाकिस्तान के पास मुल्क की तरक़्की तथा अवाम के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए कोई पैसा नहीं बचता।शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पाकिस्तान बमुश्किल एक प्रतिशत ख़र्च करता है। कहा जा सकता है कि बीते 78 साल में पाकिस्तान की आदत क़र्ज़ लेकर घी पीने की हो गई है।अब तक उसका कुल क़र्ज़ 25.66 लाख करोड़ रूपए है।पाकिस्तान के वर्तमान प्रदेशों की माली हालत भी कोई बहुत अच्छी नहीं है।पंजाब पर लगभग 6.50 अरब डॉलर का ऋण है,जो राज्यों में सर्वाधिक है।इसी तरह सिंध प्रान्त पर 4.67अरब डॉलर, खैबर पख्तूनख्वा पर 2.77 अरब डॉलर और बलूचिस्तान पर 371 मिलियन डॉलर का ऋण बक़ाया है। मतलब यह कि नए प्रदेश भी कोई पहले दिन से मुनाफ़े में नहीं रहने वाले हैं।सबको क़र्ज़ के जाल में फँसना ही होगा। मोटा मोटा अनुमान यह है कि क़र्ज़ का ब्याज चुकाने में पाकिस्तान को कई दशक लग जाएँगे।यही कारण है कि वहाँ हुकूमतों को अब आम आदमी की चिंता नहीं होती।आम आदमी को दूध लगभग 225 रूपए लीटर मिलता है,डीज़ल क़रीब 275 रूपए लीटर,चावल 200 से 400 रूपए और शकर 200 रूपए किलोग्राम मिलती है।यदि सब्ज़ियों की बात करें तो टमाटर 600 रूपए किलो, अदरक 750 रूपए किलो, लहसुन 450 रूपए किलो,हरी मटर 500 रूपए किलोग्राम, प्याज 130 से 150 रूपए किलो,भिंडी 300 रूपए किलो और आलू 200 रूपए किलोग्राम के आसपास है।सोचने वाली बात है कि आमदनी बढ़ नहीं रही है।फिर नए राज्यों का स्थापना व्यय बर्दाश्त करना कितना मुश्किल होगा ? 
व्यक्तिगत तौर पर मैं भी यह मानता हूँ कि छोटे प्रदेशों का विकास तेज़ होता है।भारत में केरल,हिमाचल,हरियाणा,तेलंगाना,छत्तीसगढ़,उत्तराखंड और झारखंड जैसे राज्य इसका शानदार नमूना हैं।लेकिन इन राज्यों के गठन को पाकिस्तान के लिए सकारात्मक प्रेरणा नही माना जा सकता।अगर हुक़ूमत का इरादा वास्तव में देश की खुशहाली और तरक़्क़ी है तब तो छोटे राज्यों का निर्माण सार्थक है।लेकिन,यदि उसके पीछे ताक़त के दम पर राज करने की मंशा हो तो ऐसे सारे प्रयोग बेकार साबित होते हैं।पाकिस्तान के सन्दर्भ में कुछ ऐसा ही है।नए नवेले फील्ड मार्शल की मंशा दिखाई देती है कि अधिक प्रदेश हों और उनमें राजनीतिक दल कुकुरमुत्ते की तरह उगाए जाएँ। यह पाकिस्तान की बड़ी पार्टियों को रास नहीं आएगा। उनकी दुकान धीरे धीरे सिकुड़ती जाएगी और सेना को नवाज़ शरीफ़,बिलावल भुट्टो तथा इमरान ख़ान की बड़ी पार्टियों को पिंजड़े में बंद करने का अवसर मिल जाएगा। बारीक़ और महीन सियासी दलों का गुच्छा फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के इशारों पर नाचता रहेगा। उन्हें और क्या चाहिए ? पाकिस्तान में बहुदलीय लोकतंत्र बना रहेगा और बड़े राजनीतिक दलों को फौज पर गुर्राने का अवसर भी नहीं मिलेगा।पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की तरह कोई भी सेना पर आक्रामक नहीं हो सकेगा क्योंकि कुकुरमुत्ता पार्टियाँ तो सेना के इशारे पर ही नर्तन करती रहेंगीं।

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