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हॉट टोपिक
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Added on : 2026-09-13 20:27:49

डाॅ. चन्दर सोनाने
                        मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से जान गंवाने का आंकड़ा बढ़कर 34 तक पहुंच गया है। अभी भी कुछ लोग आईसीयू में भर्ती है। इसमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। आखिर जहरीली शराब से मौतों का ये सिलसिला कब रूकेगा ? यह बात हर एक के मन में कौंद रही है ! 
            मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने विदेश से दिल्ली आते ही सबसे पहले सागर पहुंचकर मृतक परिवारों और अस्पताल में भर्ती गरीबों से मिलकर उनका ढांढस बंधाया। इसके साथ ही उन्होंने पूरे शराब कांड के न्यायिक जांच के भी आदेश दिये हैं। यह जांच मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विष्णु प्रतापसिंह चैहान की अध्यक्षता में होगी। 
            जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपियों का पहले से लंबा चैड़ा आपराधिक रिकाॅर्ड था। इसके बावजूद वे जेल में होने की बजाय खुलकर जहरीली शराब बनाकर मौत बांट रहे थे। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं था। सब राम भरोसे चल रहा था! 
            जहरीली शराब की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे आश्चर्यजनक और चैकांने वाले हंै। जांच में यह भी सामने आया कि बरेठी शराब दुकान का लाइसेंस यशवंत सिंह और मुख्य आरोपी मनीष लोधी एक ही व्यक्ति के दो नाम है। इस मनीष पर पहले से आबकारी अधिनियम की गैर जमानती धाराओं में अनेक केस दर्ज थे। एक ही व्यक्ति दो व्यक्तियों के नाम से जब शराब का व्यवसाय कर रहा था, तो उसमें कोई शक नहीं है कि वह बिना आबकारी विभाग और पुलिस की मिली भगत से यह सब कर रहा हो, और यह सब काफी समय से हो रहा था। 
                जहरीली शराब कांड के अन्य आरोपियों में से जिनके नाम आए हंै उनके खिलाफ भी पहले से अनेक आपराधिक केस दर्ज थे। इसके बावजूद वे खुलेआम ये सब कर रहे थे। जैसे रवि लखेरा, यह एक अन्तर्राज्जीय तस्कर है। इसका हाल ही में शाॅर्ट एनकाउंटर कर गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मनीष को शराब बनाने का फार्मुला बताता था। इस पर पहले से 25 केस दर्ज है। 
                   मनीष लोधी ने झूठे नाम से शराब दुकान का लाइसेंस ही ले रखा था। यह मुख्य आरोपी है। इसने जहरीली शराब के लिए स्पिरिट, बोतल और अलग-अलग कंपनी के नाम के लेबल उपलब्ध कराए। इस पर पहले से 11 मामले दर्ज है। इसी प्रकार चंदूराजा ने जन्माष्टमी के दो दिन पहले ही मक्का के खेत में 50 पेटी जहरीली शराब तैयार की थी। उसने इसे सागर गोल्ड के नाम से पैक किया था। इस पर पहले से 5 मामले दर्ज है। 
              पुलिस और आबकारी विभाग किस प्रकार अवैध और जहरीली शराब बिकने पर अंकुश लगाते हैं ? इसका एक उदाहरण सामने आया है, वह चैंकाने वाला है। बरामठा थाना क्षेत्र के अदावन गांव के श्री बृजेश महाराज ने पुलिस को शिकायत की कि उसके घर के सामने लल्ला बाई लोधी का परिवार अवैध शराब बेचता है। वे दो महीने से पुलिस चैकी से लेकर वरिष्ठ अफसरों तक शिकायत कर चुके थे। 31 अगस्त को उन्होंने एसपी को दिए सीसीटीवी फुटेज में सुबह और देर रात वाहनों से शराब की पेटियां उतरती हुई दिखाई। इस पर एसडीओपी से कार्रवाई का भरोसा दिया। किन्तु शिकायत के बाद आरोपियों द्वारा उसका कैमरा तोड़ दिया गया। यहीं नहीं उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का झूठा केस भी दर्ज करा दिया गया। ये है पुलिस कार्रवाई का नमूना ! 
          हाल ही में आबकारी विभाग के आयुक्त श्री दीपक सक्सेना ने यह कबूल किया कि मध्यप्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकाने हैं, जहां से अवैध शराब बिक रही है। इस दी गई जानकारी में सागर जिले में ही 84 स्थानों पर अवैध शराब बेचे जाने की जानकारी दर्ज है। ऐसे ही अवैध शराब की दुकानों में से इंदौर में 33 और भोपाल जिले में 30 स्थान बताए गए है।
           प्रदेश में जिन जिलों में अवैध शराब बिक रही है, उनमें से सबसे अधिक 140 जगहों पर रीवा जिले में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम हो रहा है। उमरिया जिले में 74 और छिंदवाड़ा जिले में 68 स्थान है। इसी प्रकार जबलपुर और गुना में 62-62 स्थनों पर अवैध शराब बेची जा रही है। नर्मदापुरम जिले में 59, राजगढ़ में 57, धार में 56 और मऊगंज में 54 स्थान हंै, जहाँ अवैध शराब बेची जा रही है। 
                   इसके अतिरिक्त दतिया और रतलाम में 47-47, शिवपुरी, भिंड और बालाघाट में 46-46 और रायसेन में 45 स्थान हंै, जहां अवैध शराब बिक रही है। मुख्यमंत्री के गृहनगर उज्जैन जिले में 28 स्थानों पर अवैध शराब बेची जा रही है। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य जिलों में से कोई भी जिला ऐसा नहीं है, जहां अवैध शराब के अड्डे दहाई संख्या से कम हो। 
                  यहां प्रश्न ये उठता है कि जब आबकारी विभाग के मुखिया ने खुद कबूल किया है कि प्रदेश में 1766 ठिकाने ऐसे हैं, जहां अवैध शराब बिक रही है तो अभी तक आबकारी विभाग और पुलिस विभाग क्या कर रहे थे ? क्या वे अवैध और जहरीली शराब से 34 मौतों का इंतजार कर रहे थे ? यह प्रश्न उनसे पूछा जाना चाहिए!
              इस जहरीली शराब कांड में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मुख्य आरोपी अभी तक फरार है। राज्य सरकार द्वारा बंडा एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल और सागर की प्रभारी एसडीएम आरती यादव को कलेक्टर कार्यालय सागर अटैच कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ लोगों को संस्पेंड कर दिया गया। उनमें सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते ,आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक रोशनी उरेते, बंडा थाना प्रभारी राजेन्द्र सिंह कुशवाह और गूगरा चैकी प्रभारी पूरनलाल लड़िया हंै। फ्लाईंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर अटैच कर दिया गया। किन्तु किसी भी बड़े अधिकारी पर हाथ नहीं डाला गया ! यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है। 
            मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने सागर के भ्रमण के दौरान मीडिया से यह कहा था कि दोषी कितना ही बड़ा क्यों न हो उसको बक्शा नहीं जायेगा। साथ ही अवैध शराब बेचने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी। इसलिए प्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकानों को नस्तनाबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की सख्त आवश्यकता है। जब मुख्यमंत्री ने सागर में यह स्पष्ट रूप से कह दिया है कि अवैध और जहरीली शराब बेचने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई के लिए सभी अधिकारियों को फ्री हैंड दे दिया गया है, तो ये अधिकारी किस बात का इंतजार कर रहे हंै ?

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